आओ ज़िंदगी की नई शुरुआत करें

किसी साल का बीत जाना कभी भी इतना महत्वपूर्ण नहीं रहा जितना की इस साल का यह साल जैसे एक सदी या जैसे एक लम्हा और यह सबको याद रहेगा अलग अलग अनुभवों के साथ, यादों के साथ इस साल के बाद यह तय है कि कोई भी वैसा नहीं रहेगा जैसा वो पहले था अर्थात मुश्किलों ने किसी को जोड़ा है तो किसी को तोडा है।

रिश्तों कि अच्छी खासी परेड हुई है, किसी का दिल टुटा और किसी को सहारा मिला। किसी ने अपनों को खोया और किसी को परायों में अपने मिल गए। कुछ सपनें टूटे और कुछ नए सपनों ने जन्म लिया, कुछ गलतफहमियाँ मिटी और कुछ बन भी गयी। कुछ को अपनी क्षमताओं का अहसास हुआ और कुछ ने स्वंय का विश्वास खोया। कुछ ने अवसर खोये, कुछ ने अवसर बनाये।

एक बात जिसकी कमी खली – बच्चों कि मस्ती और खिलखिलाते चेहरे, कुछ बातें जिन्होंने बहुत सुकून दिया – जब आप बहुत निराश थे हताश थे तो किसी का तुम्हारे साथ घंटों बातें करना ,प्यार से कंधे पर हाथ रखके, हाथों को हाथ में लेकर ,गले लगाकर, चूमकर यह कहना ” मैं हूँ ना साथ तुम्हारे,अपनों के साथ बिताया वक्त ,उनका हम पर विश्वास, बिना कहे चुपके से मदद कर जाना। एक दूसरे के लिए मदद को आगे आना। वैसे ये सारे अनुभव ज़िंदगी में किसी ना किसी वक्त पर सबको होते ही है। बस इस साल ने ये सारे अनुभव एक साथ दे दिए।

मूलरूप से तो इस समय ने हमें और परिपक्व बनाया है और तैयार किया है ज़िंदगी को अच्छे से जीने के लिए।
ज़िन्दगी कि सबसे खूबसूरत बात ये है कि उसमे होने वाली हर घटना, परिस्थिति का एक मकसद होता है और अगर वो मकसद हम समझ जाये तो ज़िंदगी और खूबसूरत हो जाती है।

आने वाले साल का स्वागत के लिए ये मेरा ये शेर :
” क्या हुआ जो आज हम किसी और के महबूब है
दुआए उस महबूब के लिए भी जिससे हमने मोहब्बत सीखी
निभा लेंगे ये रिश्ता खूब,बारीकियां मोहब्बत की जो हमने उस बेवफा से सीखी “

तो जो कुछ भी सीखा है इस साल से अपने जीवन में ढाले और एक स्वस्थ मस्त व् बेहतर जीवन जिए , यह तय है कि अगर इस पृथ्वी पर हमारे जीवन को कोई आसान बना सकता है तो वह हम स्वंय है और हम ही है जो दूसरों के लिए ही इसको आसान , सहज व् सरल कर सकते है। तो आइए इस नववर्ष में ज़िन्दगी को और सहज- सरल और आसान बनाये और इस दुनिया को और खूबसूरत बनाए !!
नववर्ष कि शुभकामनायें !! और अंत: में एक ख़ास दोस्त के लिए लिखी इस लाइन के साथ

” अगर इतनी तकलीफों के बाद भी इतना ख़ास साथी मिले तो मैंने माफ़ किया इस साल को “

स्नेह -प्रेम व् विश्वास के साथ
उदयसिंह

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